जब Flipkart से भिड़ा Amazon, भारत में शुरू हुई ई-कॉमर्स रेस, बदल गया शॉपिंग का अंदाज

Amazon Vs Flipkart: अमेजन और फ्लिपकार्ट की टक्कर ने भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का अंदाज पूरी तरह बदल दिया. डिस्काउंट, तेज डिलीवरी और टेक्नोलॉजी के दम पर दोनों कंपनियों ने ग्राहकों की उम्मीदें नई ऊंचाई पर पहुंचाई और छोटे सेलर्स को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मुहैया कराया. 

नई दिल्ली. भारत में ऑनलाइन शॉपिंग आज जितनी आसान और आम लगती है, उसकी नींव एक जबरदस्त मुकाबले ने रखी थी- फ्लिपकार्ट (Flipkart) बनाम अमेजन (Amazon). यह सिर्फ दो कंपनियों की टक्कर नहीं थी, बल्कि उस दौर की शुरुआत थी जिसने भारतीय कंज्यूमर्स की खरीदारी की सोच, आदत और उम्मीदें हमेशा के लिए बदल दीं.

देसी स्टार्टअप से शुरुआत
साल 2007 में सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने फ्लिपकार्ट की शुरुआत एक ऑनलाइन बुक स्टोर के तौर पर की. उस समय भारत में ई-कॉमर्स लगभग न के बराबर था. इंटरनेट की पहुंच सीमित थी, ऑनलाइन पेमेंट पर भरोसा कम था और लोग सामान खरीदने के लिए दुकान पर जाना ही सुरक्षित मानते थे. ऐसे माहौल में फ्लिपकार्ट ने कैश ऑन डिलीवरी (COD) जैसा ऑप्शन पेश किया, जिसने लाखों भारतीयों को पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग के लिए तैयार किया. धीरे-धीरे फ्लिपकार्ट ने किताबों से आगे बढ़कर मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन जैसे कैटेगरी में कदम रखा. फास्ट डिलीवरी, आसान रिटर्न और आक्रामक डिस्काउंट ने इसे भारत का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बना दिया.

Amazon की एंट्री और खेल का बदलना
साल 2013 में जब अमेजन ने भारत में आधिकारिक तौर पर एंट्री की, तब तक फ्लिपकार्ट एक मजबूत ब्रांड बन चुका था लेकिन अमेजन सिर्फ एक नई कंपनी नहीं थी, बल्कि एक ग्लोबल जायंट था. अमजेन ने आते ही साफ कर दिया कि वह भारत को लेकर लंबी रणनीति के साथ आया है. ‘ग्राहक ही राजा है’ (Customer is King) के सिद्धांत पर चलते हुए कंपनी ने भरोसेमंद डिलीवरी, विशाल प्रोडक्ट रेंज और बेहतर लॉजिस्टिक्स पर फोकस किया. इसके साथ ही प्राइम मेंबरशिप, फास्ट शिपिंग और कंटेंट इकोसिस्टम ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया.

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डिस्काउंट वॉर और बिग बिलियन डेज
फ्लिपकार्ट और अमेजन की टक्कर का सबसे बड़ा असर सेल सीजन में दिखा. फ्लिपकार्ट ने बिग बिलियन डेज (Big Billion Days) की शुरुआत की, तो अमेजन ने ग्रेट इंडियन फेस्टिवल (Great Indian Festival) से जवाब दिया. मोबाइल फोन से लेकर टीवी, फ्रिज, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरतों तक सब कुछ भारी छूट पर मिलने लगा. इस डिस्काउंट वॉर ने भारतीय ग्राहकों की उम्मीदें बदल दीं. अब लोग त्योहारों का इंतजार सिर्फ पूजा या खरीदारी के लिए नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेल के लिए करने लगे. ईएमआई, एक्सचेंज ऑफर और नो-कॉस्ट ईएमआई जैसे ऑप्शन आम हो गए.

लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी की रेस
यह मुकाबला सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं रहा. दोनों कंपनियों ने वेयरहाउस, डिलीवरी नेटवर्क और टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर का निवेश किया. छोटे शहरों और कस्बों तक डिलीवरी पहुंची. ऑर्डर ट्रैकिंग, वन-डे और सेम-डे डिलीवरी जैसे फीचर आम हो गए. फ्लिपकार्ट ने भारतीय बाजार की नब्ज समझते हुए लोकल जरूरतों पर फोकस किया, जबकि अमेजन ने डेटा और एल्गोरिदम के दम पर पर्सनलाइज्ड शॉपिंग अनुभव दिया. नतीजा यह हुआ कि ग्राहक को बेहतर सर्विस, ज्यादा ऑप्शन और कम कीमत पर चीजें मिलने लगी.

छोटे कारोबारियों को मिला नया प्लेटफॉर्म
फ्लिपकार्ट-अमेजन की जंग का एक बड़ा असर यह रहा कि लाखों छोटे सेलर्स और एमएसएमई को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मिला. अब एक छोटा व्यापारी भी देशभर में अपने प्रोडक्ट बेच सकता था. इससे रोजगार के नए अवसर बने और सप्लाई चेन का विस्तार हुआ.

शॉपिंग का अंदाज पूरी तरह बदला
इस ई-कॉमर्स रेस ने भारतीय कंज्यूमर की सोच ही बदल दी. अब शॉपिंग सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक अनुभव बन गई. रिव्यू पढ़ना, कीमतों की तुलना करना, घर बैठे ऑर्डर करना और बिना झंझट रिटर्न ये सब न्यू नॉर्मल बन गए. अब तो दोनों कंपनियां क्विक कॉमर्स के जरिए 10 मिनट में डिलीवरी का वादा कर रही हैं. इनके बीच मुकाबला अब भी जारी है, लेकिन एक बात साफ है कि इस जंग के असली विजेता भारतीय ग्राहक हैं. आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, एआई और क्विक कॉमर्स के साथ यह रेस और तेज होने वाली है.

Source: https://hindi.news18.com/news/business/latest-amazon-vs-flipkart-started-india-e-commerce-race-changed-shopping-style-ws-e-9989943.html

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